कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती: ₹80 हजार का इंजेक्शन अब ₹7,150 में मिलेगा, 543 ब्रांड की नई MRP जारी

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नई दिल्ली। कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने कैंसर की कई महंगी दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती की है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 543 ब्रांड की एंटी-कैंसर दवाओं की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) जारी कर दी है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी।

सरकार के इस फैसले से कैंसर के इलाज पर होने वाला खर्च कम होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि कुछ दवाओं की कीमतों में 90 प्रतिशत से भी अधिक की कमी दर्ज की गई है।

137 कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की सीमा तय

केंद्र सरकार के औषधि विभाग के तहत काम करने वाले NPPA ने 17 अक्टूबर 2026 को 137 नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया था।

इसी फैसले के बाद कंपनियों से मिली जानकारी के आधार पर 543 ब्रांड और पैक की नई MRP जारी की गई है। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में अत्यधिक मुनाफे पर नियंत्रण लगाना और मरीजों को कम कीमत पर जरूरी दवाएं उपलब्ध कराना है।

इन कैंसर दवाओं की कीमतों में सबसे ज्यादा राहत

जारी की गई संशोधित कीमतों में कई दवाओं के दाम काफी कम हुए हैं। उदाहरण के तौर पर:

1. Thiotepa – Samtepa 100mg इंजेक्शन

  • पुरानी कीमत: ₹80,071.86
  • नई कीमत: ₹7,150.33
  • कीमत में कमी: लगभग 91.1 प्रतिशत

2. Palbociclib – Palbopro 125mg (21 कैप्सूल)

  • पुरानी कीमत: ₹40,421.33
  • नई कीमत: ₹2,720
  • कीमत में कमी: लगभग 93.3 प्रतिशत

इन बदलावों से संबंधित ब्रांड और पैक खरीदने वाले मरीजों को काफी आर्थिक राहत मिल सकती है।

9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें

NPPA की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, संशोधित MRP 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होगी। इसके बाद दवा निर्माता कंपनियों, मेडिकल स्टोर और अस्पतालों को नई कीमतों के अनुसार ही दवाएं बेचनी होंगी।

अस्पतालों और मेडिकल स्टोर को भी संशोधित कीमतों की सूची प्रदर्शित करनी होगी, ताकि मरीजों को दवाओं के सही दाम की जानकारी मिल सके।

मरीज दवाओं की नई कीमतों की जानकारी के लिए सरकार के Pharma Sahi Daam ऐप और NPPA की आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैंसर मरीजों को सालाना ₹2,500 करोड़ की बचत की उम्मीद

सरकार के इस कदम से कैंसर मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है। अनुमान के मुताबिक, इस पहल से मरीजों को हर साल करीब ₹2,500 करोड़ की बचत हो सकती है।

यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें लंबे समय तक महंगे इंजेक्शन, टैबलेट और अन्य कैंसर उपचार संबंधी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।

आयात होने वाली दवाओं की एक्सपायरी को लेकर भी बदला नियम

कैंसर की दवाओं की कीमतों में कटौती के साथ ही केंद्र सरकार ने आयात होने वाली दवाओं की शेष शेल्फ लाइफ (Residual Shelf Life) को लेकर भी नियम में बदलाव किया है।

नए नियम के अनुसार, भारत में आयात के समय सामान्य दवाओं की कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ होना जरूरी होगा।

हालांकि, Biological Medicines और Radiopharmaceuticals जैसी विशेष दवाओं के लिए लेबल पर दी गई कुल शेल्फ लाइफ का कम से कम 60 प्रतिशत शेष रहने की छूट जारी रहेगी।

इस बदलाव का उद्देश्य कम शेष अवधि वाली दवाओं के आयात को रोकना और अस्पतालों तथा मरीजों को दवाओं के इस्तेमाल के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है।

मरीजों के लिए क्या होगा फायदा?

सरकार के इन फैसलों से दवाओं की कीमतों और उपलब्धता से जुड़ी कई समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • कैंसर की कई महंगी दवाएं कम कीमत पर उपलब्ध होंगी।
  • इलाज के दौरान परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
  • दवाओं की नई MRP की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी।
  • कम शेल्फ लाइफ वाली आयातित दवाओं के इस्तेमाल का जोखिम कम होगा।

ध्यान दें: कीमतों में कटौती केवल संबंधित सूची में शामिल दवाओं, ब्रांड और पैक पर लागू होगी। दवा खरीदने से पहले उसकी नई MRP जरूर जांचें और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा या उसकी खुराक में बदलाव न करें।